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Tuesday, December 22, 2009

DUNIYA...

प्यार भले कितना ही कर लो, दिल में कौन बसाता है .
मीत बना कर जिसको देखो, उतना ही तड़पाता है .
मेरा दिल आवारा पागल, नगमें प्यार के गाता है
ठोकर कितनी ही खाई पर बाज नही यह आता है .
मतलब की है सारी दुनिया कौन किसे पहचाने
अब किस पे भरोसा, हर कोई भरमाता है .
अपना दुख ही सबको लगता सबसे भारी दुनिया मेंबस
अपने ही दुख में डूबा अपना राग ही गाता है .
खून के रिश्तों पर भी देखो छाई पैसे की माया
देख के अपनो की खुशियों को हर चेहरा मुरझाता है .
कहते हैं अब सारी दुनिया सिमटी मुट्ठी में लेकिन
सात समंदर पार का सपना सपना ही रह जाता है .
इंसा नाच रहा हैवां बन, कलयुग की कैसी छाया
मैने जिसको अपना माना, मुझको विष वो पिलाता है .
आँख में मेरी आते आंसू, जब भी करता याद उसे
दूर नही वह मुझसे लेकिन, पास नही आ पाता है .
इक लम्हे के लिए भी जिसने, अपना दिल मुझको सौंपा
जीवन भर फिर याद से अपनी, मुझको क्यूँ वो रुलाता है .
मेरे पैरों में सर रख कर, दर्द की दी उसने दुहाई
दर्द की लेकर मुझसे दवाई मुझको आँख दिखाता है .

2 comments:

  1. once again . its too good .. but i cudn't relate this line with the poem "देख के अपनो की खुशियों को हर चेहरा मुरझाता है ."

    please clarify .. i m sorry for my lack of sense

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  2. Firstly, its not mine. And this sentence try to say dat in present world, no one can see happiness of their closed 1's. Its all abt this duniya...nothing else.

    Thnx 4 ur comments...

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